
श्री लीलामृत
रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्य स्वयं कवि और लेखक हैं। उन्होंने मात्र 18 दिनों में 3,051 ओवियों का यह पद्यात्मक ग्रंथ रचा। मानवी मन को सात्त्विक बनाने तथा रजोगुण और तमोगुण के दुष्प्रभावों से दूर रहने के लिए इस ग्रंथ में अत्यंत प्रेरक मार्गदर्शन दिया गया है।














