
हर वर्ष, हजारों भक्त निजधाम (ननीजपीठ) तक की लंबी पदयात्रा में सहभागी होते हैं।इस यात्रा का उद्देश्य केवल धार्मिक नहीं, बल्कि अत्यंत जागरूकता से भरा है — पर्यावरण संरक्षण, आध्यात्मिक जागरण, और सामाजिक सद्भावना का संदेश जन-जन तक पहुँचाना।

वसुंधरा डिंडी क्या है?
वसुंधरा पायी डिंडी केवल एक तीर्थयात्रा नहीं, बल्कि धरती माता की रक्षा का एक मिशन है।सन् 2023 से जगद्गुरु रामानंदाचार्यजी महाराज के भक्त देशभर में सैकड़ों किलोमीटर की पदयात्राएँ कर रहे हैं — जलवायु परिवर्तन, जल संरक्षण, और प्रकृति के साथ संतुलित जीवन के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए।
इन पदयात्राओं का उद्देश्य केवल चलना नहीं, बल्कि एकता, समर्पण और सक्रिय कार्य का प्रतीक बनना है।देश के विभिन्न क्षेत्रों से होकर गुजरने वाली ये यात्राएँ पर्यावरण के प्रति मानवता की सामूहिक जिम्मेदारी को उजागर करती हैं।
🌿 पदयात्राओं के प्रमुख मार्ग वसुंधरा डिंडी सात प्रमुख मार्गों से होकर गुजरती है, जो हजारों किलोमीटर की दूरी तय करते हुए असंख्य लोगों को प्रेरणा देती है —
1️⃣ पूर्व विदर्भ उपपीठ – श्रीक्षेत्र नेर्ले → कामठी → नागपूर📏 1,022 किमी | 40 दिन
2️⃣ मराठवाडा उपपीठ – श्रीक्षेत्र सिमुर्गांव → पाथरी → परभणी📏 532 किमी | 23 दिन
3️⃣ उत्तर महाराष्ट्र उपपीठ – श्रीक्षेत्र रामसेज → दिंडोरी → नाशिक📏 527 किमी | 23 दिन
4️⃣ पश्चिम महाराष्ट्र उपपीठ – श्रीक्षेत्र नार्हे → हवेली → पुणे📏 354 किमी | 16 दिन
5️⃣ मुंबई उपपीठ – श्रीक्षेत्र शिर्साट फाटा → वसई → पालघर📏 391 किमी | 17 दिन
6️⃣ तेलंगाणा उपपीठ – श्रीक्षेत्र दोसपल्ली → जुक्कल → कामारेड्डी📏 605 किमी | 25 दिन
7️⃣ गोवा उपपीठ – श्रीक्षेत्र बणगाणी → तिसवडी → गोवा📏 243 किमी | 11 दिन
इन सातों यात्राओं का एक ही संदेश है —“धरती हमारी माँ है, उसकी रक्षा हमारा धर्म है।” 🌏💚



