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रामानंदाचार्य का प्रबोधन और संदेश
“तुम जीओ, और दूसरों को भी जीने दो”—यह रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्य का बुनियादी संदेश है। मानवी देह मोक्ष-प्राप्ति के लिए मिला है। मोक्ष का अर्थ है—“मैं देह नहीं, बल्कि आत्मा हूँ”—इस वस्तुस्थिति को पहचानकर उसी के अनुरूप जीवन जीना, और देह-आधारित अज्ञान से मुक्त होना।
मानवी देह ज्ञान, विज्ञान और अज्ञान का गहन बोध पाने में समर्थ है। क्योंकि समस्त ब्रह्मांड में व्यापित परमात्मतत्त्व इस देह में भी विराजमान है, इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को उस दैवी उपस्थिति का अनुभव करना चाहिए। प्रत्येक को “अहं ब्रह्मास्मि—मैं ही ब्रह्म हूँ”—इस महान सत्य की अनुभूति करनी चाहिए। उनके सभी प्रवचनों का केंद्र यही रहता है कि जन्म के पश्चात मनुष्य अपने स्व-स्वरूप को कैसे पहचाने और उस अनुभूति के अनुसार कैसे जिए।
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